योगीराज कनखल स्वामी


कनखल स्वामी एक महायोगी थे। हरिद्वार के कनखल गांव में वे काफी समय तक साधना किये। वहाँ गांव के नजदीक ही श्मशान भूमि थी जहाँ वे अपनी साधना में सिद्ध हुए थे। वे तो स्वयं शिवस्वरूप थे। ऐसे आत्मज्ञानी योगी करोड़ों में कोई विरले ही होते हैं। जगत के कल्याणार्थ वे समय-समय पर अवतरित होते हैं। स्वामी जी का वास्तविक नाम तो किसी को ज्ञात नहीं है परन्तु कनखल गांव में ही अपनी लीला का अंतिम समय उन्होंने बिताया था और वहाँ के तथाकथित श्मशान भूमि में समाधि लिये थे. इसलिए लोग उन्हें ‘कनखल स्वामी’ के नाम से जानते हैं।
उनके जन्म के सम्बन्ध में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। फिर भी लोग उन्हें हनुमत अवतार महायोगी तपसी सरकार और महर्षि रमण के समकालीन मानते हैं।
अभी तो उनका पांचभौतिक शरीर विद्यमान नहीं है परन्तु शरीर छोड़ने के बाद भी उन्होंने अनेकों चमत्कार किये और भक्तों को दर्शन भी दिए। कुछ चमत्कारों के बारे में ही हमें जानकारी है जो हमारे पूज्य गुरूजी श्री सुशील वशिष्ठ जी के साथ घटित हुए…

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Mahayogi Tapsi Sarkar